ऐसा कई लोगों के साथ होता है कि आप होशियार होते हैं, आपको मालूम भी होता है कि आप ये काम कर लेंगे लेकिन आप बस फ़ैसला नहीं कर पाते हैं कि ये कब करें. कुछ ऐसा ही हुआ मशहूर निर्माता-निर्देशक, अभिनेता और गायक फ़रहान अख्तर के साथ. फ़रहान आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. फ़रहान ने बतौर निर्देशक ख़ुद को साबित किया और उसके बाद जब वह एक्टिंग की दुनिया में उतरे तो वहाँ भी उन्होंने शानदार कामयाबी हासिल की.

Farhan Akhtar

दिल चाहता है(2001), लक्ष्य(2004)), और डॉन(2006) जैसी फ़िल्मों का निर्देशन करने के बाद फ़रहान बतौर अभिनेता दर्शकों के सामने आए. बतौर अभिनेता उनकी पहली फ़िल्म ‘रॉक ऑन’ थी. ये फ़िल्म सन 2008 में रिलीज़ हुई और फ़रहान रातों-रात स्टार की हैसियत पा गए. बतौर अभिनेता उन्होंने कई शानदार फ़िल्में कीं जैसे लक बाय चांस, ज़िन्दगी न मिलेगी दुबारा, भाग मिल्खा भाग, दिल धड़कने दो इत्यादि.

उन्हें अपने काम के लिए कई अवार्ड्स से नवाज़ा गया है. सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ निर्माता, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता,और सर्वश्रेष्ठ डायलॉग की केटेगरी में फ़िल्म फेयर पुरूस्कार मिले हैं जबकि उन्हें कई और केटेगरीज़ में नॉमिनेशन मिल चुका है. फ़रहान की इन कामयाबियों को देखकर लगता है कि फ़रहान अपनी ज़िन्दगी में कितने व्यवस्थित रहे होंगे. परन्तु ऐसा पूरी तरह सच नहीं है.

आपको बता दें कि फ़रहान मशहूर लेखक-शाइर जावेद अख्तर और हनी ईरानी के बेटे हैं. जावेद और हनी का 1985 में तलाक़ हो गया था. ऐसा कहा जाता है कि जब फ़रहान 24-25 साल के थे तब उनकी माँ हनी ईरानी ने साफ़ कर दिया कि अगर वह अपने करीयर को लेकर कुछ अच्छा फ़ैसला नहीं करते हैं तो वह उन्हें घर से निकाल देंगी.

हनी ईरानी अपने बेटे को लम्बे समय से करीयर को लेकर सीरियस होने के लिए कह रही थीं लेकिन फ़रहान किसी न किसी वजह से शुरुआत नहीं कर पा रहे थे. हनी ईरानी ने जब फ़रहान से घर से निकाले जाने वाली बात कही तो फ़रहान को भी लगा कि कुछ करने की ज़रूरत है. तभी उन्होंने ‘दिल चाहता है’ फ़िल्म पर काम करना शुरू किया.

इस फ़िल्म में उन्होंने आमिर ख़ान, प्रीती ज़िंटा, अक्षय खन्ना, सैफ़ अली ख़ान, डिम्पल कपाड़िया और सोनाली कुलकर्णी को साइन किया. मुंबई में रहने वाले अमीर युवाओं की ज़िन्दगी पर आधारित ये फ़िल्म अपनी रीयलिस्टिक अप्रोच के लिए पसंद की गई. दिल चाहता है फ़िल्म के लिए फ़रहान को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले का फ़िल्मफेयर पुरूस्कार मिला. इस फ़िल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरूस्कार भी मिला.

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