इन दिनों शायद दर्शक फ़िल्म देखने से पहले ही फ़िल्म को जज करना चाहते हैं या ये कहें कि पहले ही किसी भी चीज़ को जज करना एक आदत बनती जा रही है। ऐसा कई फ़िल्मों के साथ देखा गया है कि फ़िल्म के अनाए से पहले ही उसके साथ विवाद जुड़ जाते हैं हाल में ऐसे कई विवाद सामने आ रहे हैं। कुछ यही हुआ जब फ़िल्म “गुलमकई” का ट्रेलर लॉंच हुआ।

आपको बता दें ये फ़िल्म पाकिस्तान की ऐक्टिविस्ट मलाला युसूफज़ई की ज़िन्दगी पर आधारित है। फ़िल्म महीने के अंत में रीलिज़ होने वाली है। लेकिन जैसे ही इसका ट्रेलर सामने आया कि विवादों की शुरुआत हो गयी। दरअसल फ़िल्म के ट्रेलर में एक सीन है जिसमें कहा गया है कि “हमारे पश्तो क़बीलों में लड़कियों के पैदा होने पर जश्न नहीं मनाया जाता”। इस बात पर पश्तो लोगों की ओर से आपत्ति जतायी गयी।

कुछ पश्तो लोगों ने कहा कि ऐसा बिलकुल नहीं है बल्कि हम लड़कियों के पैदा होने पर हमेशा ही ख़ुश होते हैं। फ़िल्म में इस तरह के डायलॉग से वो हैरान हैं क्योंकि इससे उनके बारे में लोगों की ग़लत राय क़ायम हो जाएगी। जबकि फिल्म के निर्देशक अमजद ख़ान ने कहा कि जब तक फिल्म देखेंगे नहीं आपको फिल्म का सन्देश नहीं मिलेगा। निर्देशक अमजद कहते हैं कि ये फिल्म मलाला की ज़िन्दगी पर आधारित है और हमने इसको लेकर कड़ी मेहनत की है और फिल्म में किसी की भी भावना को ठेस नहीं पहुंचाई गई है।

आपको बता दें कि निर्देशक अमजद ख़ान पिछले दिनों CAA के विरोध में कुछ ट्वीट करके ख़ुद भी विवादों में आ गए हैं। जिससे उनकी फ़िल्म पर क्या असर हो सकता है शायद वो भी जानते हैं ऐसे में ट्रेलर लॉंच पर ही विवाद की शुरुआत फ़िल्म के लिए रुकावट न बने। लेकिन इन बातों से न घबराते हुए अमजद ख़ान ने कहा कि “वो CAA को सही नहीं मानते तो ये बात कहने में पीछे नहीं रहेंगे। रही बात फ़िल्म की तो फ़िल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसी कि भावना को ठेस लगे”

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