जब भी कोई विवादित मुद्दा सामने आता है चाहे वो सरकार की ग़लत नीतियाँ हों या बॉलीवुड में हुआ किसी का शोषण अधिकांश सितारे नज़र बचाते और चुप्पी साधते नज़र आते हैं। बॉलीवुड में बहुचर्चित हैशटैग मी टू में यूँ तो कई कलाकारों का नाम सामने आया लेकिन सबसे चर्चित रहा आलोक नाथ और नाना पाटेकर के खलाफ लगा मी टू केस। तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर ये इल्ज़ाम लगाया था कि उन्होंने फ़िल्म में गाने की शू के दौरान उन्हें ग़लत तरीक़े से छुआ था और साथ ही कोरियोग्राफ़र गणेश आचार्य ने भी उनका साथ दिया था।

तनुश्री की ये बात बहुत दूर तक गयी तो और कई केसेज बाहर भी आए लेकिन आख़िरकार सभी दब गए। इस मामले में तनुश्री ने बयान देते हुए कहा। है कि “अगर आपके पास पैसा है तो आपको न्याय और सम्मान दोनों मिलेगा, लेकिन अगर पैसा नहीं है तो इनमें से कुछ नहीं मिलने वाला।उनके पास पैसा है और यह उन्हें नाम फाउंडेशन से मिला है। यह गरीब किसानों के उत्थान के लिए कई कॉर्पोरेट क्षेत्रों से पैसे इकट्ठा करते हैं। उन्होंने अपनी छवि घर में रहने वाले एक गरीब व्यक्ति के रूप में बनाई हुई है। यह बहुत बड़ा झूट है और यह सब वह केवल दिखावे के लिए करते हैं।”

नाना पाटेकर को उनके सामाजिक कार्यों से काफ़ी सम्मान और अलग पहचान मिली है जिसका हवाला उनके केस के दौरान भी दिया जाता रहा है। नाना के उस सामाजिक व्यक्तित्व पर तनुश्री ने तीखा प्रहार करते हुए ने कहा “लोगों को बेवकूफ बनाना बहुत आसान है। आपको बस एक सफेद गांधी टोपी और एक सफेद कुर्ता पहनना होगा। आसाराम सफेद कुर्ता पहनता है। वह भी मंदिरों के सामने अपने हाथ जोड़ते हैं और संत बनते हैं। कौन जांच रहा है कि वह वास्तव में किसानों को पैसा दे रहे हैं।”

आगे तनुश्री ने कहा कि “कुछ महीनों पहले, मैंने सुना था कि वह बाढ़ पीड़ितों के लिए 500 घर बना रहे हैं। कौन जांच रहा है? कल, मैं कह दूंगी कि मैं टिंबकटू की रानी हूं, मैंने चांद पर बड़ा सा घर बना रखा है और मैंने एलियन्स के लिए 500 घर बनवाए हैं तो क्या आप मेरा भरोसा करेंगे? उन्होंने 500 घर बनाने के लिए धन जरूर एकत्र किये होंगे लेकिन हम ऐसे लोगों की जांच नहीं करते, जो वाकई में गैर सरकारी संगठन चलाते हैं।”

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