हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता राजेन्द्र कुमार ने अपने करियर में कई बड़ी बड़ी फिल्में दी हैं। उनके फिल्मी करियर में एक ऐसा भी वक़्त आया था जब उनकी लगभग हर फिल्म सि’ल्वर जुब’ली हुआ करती थी। यानी उनकी अमूमन हर फिल्म 25 हफ्तों तक सिनेमा घरों में चला करती थी। जिसके चलते लोग उन्हें प्यार से ‘जुब’ली कुमार’ के नाम से बुलाने लगे थे। यह वो समय था जब फिल्म इंड’स्ट्री में सुपर स्टार नहीं हुआ करते थे, लेकिन अगर इस वक़्त सुपर स्टार्स का सिलसिला होता तो राजेन्द्र कुमार का नाम भी इसमें शा’मिल होता। आज हम आपको उनकी ज़िंदगी से जु’ड़ी कुछ बातें बताते हैं।

राजेन्द्र कुमार अपना सपना पूरा करने के लिए सब कुछ छोड़ पाकि’स्तान से भारत आए थे। ज़िंदगी गुजारने के लिए उन्हें पैसों की जरूरत थी और पैसा कमाने के लिए उन्हें कोई जरिया चाहिए था। ऐसे में उन्होंने डायरे’क्टर के तौर पर फिल्मों में जाने का फैसला किया। अच्छे घर के होने के बावजूद अपना सपना पूरा करने के लिए उनके पास टिक’ट खरीदने तक के पैसे नहीं थे। अपनी इस जरूरत को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी कलाई की घड़ी बेचनी पड़ी। 50 रुपए में अपनी घड़ी बेचकर उन्होंने 13 रुपए का फ्रंटी’यरमेल का टिक’ट खरीदा और मुंबई आ गए। मुंबई पहुंचने के बाद राजेन्द्र कुमार डायरेक्टर एच.एस.रवेल को असिस्ट करने लगे।

Rajendra kumar, Dharmendra, Vinod Khanna, Dilip Kumar, Shashi Kapoor
1950 में आई फिल्म ‘जोगन’ से राजेन्द्र कुमार ने फिल्मी दुनिया में क़द’म रखा। इस फिल्म में दिलीप कुमार और नर्गिस के साथ उन्हें काम करने का मौका मिला। उन्हें इस फिल्म के लिए 1500 रुपए मिले थे। यह फिल्म काफी हि’ट हुई और लोगों को राजेन्द्र कुमार का काम भी बहुत पसंद आया था। पहली फिल्म हि’ट होने के बाद ही उन्हें कई बेहतरीन फिल्मों के ऑफर आने लगे और उन्होंने मदर इंडिया, संगम, मेरे महबूब, गंवार, गोरा और काला, रुस्तम जैसी बड़ी- बड़ी फिल्मों में काम किया। बता दें कि राजेन्द्र कुमार ने प्रोड्यूसर के तौर पर भी कई फिल्में बनाई हैं। 1981 में आई फिल्म ‘लव स्टोरी’ में उन्होंने अपने बेटे कुमार गौरव को लॉन्च किया।