बॉलीवुड में कोरियोग्राफ़ी में महिलाओं की एक अलग पहचान बनाने वाली सरोज ख़ा’न ऊँचाई पर रहीं। सरोज ख़ा’न का कामकाजी जीवन जितना उपलबधियों वाला रहा उनका निजी जीवन उतना ही मु’श्किल रहा। सरोज ख़ा’न किशनचंद सिद्धू और नीनी सिद्धू के घर जन्मी। भारत विभाजन के बाद परिवार की स्थि’ति को देखते हुए फ़िल्मों में काम करने लगी। सिर्फ़ 3 साल की थीं जब पहली बार फ़िल्म में काम किया।

बाद में एक डान्सर की तरह काम करती सरोज ख़ा’न ने नृत्य को ही अपनाने का फ़ै’सला किया। 13 साल की थी जब उनके डान्स गुरु B सोहनलाल ने एक रोज गले में का’ला धागा बाँ’धकर कहा कि अब सरोज उनकी पत्नी है। इस बात से ख़ुशी में डूबी सरोज ख़ा’न को पहले बेटे के जन्म के बाद पता चला कि 30 साल बड़े पति पहले से शादीशुदा हैं।

1965 में जब दूसरे बच्चे के रूप में एक बेटी ने जन्म लिया और 8 महीने में ही द’म तो’ड़ दिया और ऐसे में भी पति ने कोई साथ नहीं दिया। न ही उनके बच्चों को अपना नाम ही दिया तो सरोज ख़ा’न ने उन्हें छो’ड़ने का नि’र्णय किया।8 महीने की बेटी को द’फ़ना’ने के बाद तुरंत काम के लिए ट्रेन पक’ड़कर सरोज ख़ा’न निक’ल गयी थीं। अपने दम पर उन्होंने एक मु’क़ाम हा’सिल किया ये राह आसान तो नहीं थी लेकिन मेहनत के ब’ल पर वो ऊँची उठती गयीं।

सरोज ख़ा’न ने बाद में एक पठान से शादी की जिनकी पहले से एक पत्नी थी। पहले तो सरोज ख़ा’न ने इस शादी के लिए म’ना किया था पर जब उन्हें प’ठान के प्यार की सच्चाई का आ’भास हुआ तो उन्होंने उनसे शादी कर ली।पर इस शादी के कारण सरोज ख़ा’न ने मु’स्लिम ध’र्म नहीं अपनाया बल्कि इसके पीछे एक बहुत अल’ग कहानी है।अपने एक इंटरव्यू में सरोज ख़ा’न ने इस बात का उल्लेख किया था।

सरोज ख़ा’न ने बताया था कि उन्होंने शादी के बाद ध’र्म बद’लने की कोशिश नहीं की। हाँ, शादी के बाद उनकी मु’स्लिम ध’र्म से पहचान ज़रूर हुई। सरोज ख़ा’न ने बताया कि जिस तरह से बच्चों को ता’लीम दी जाती है वो उन्हें अच्छी लगती थी। वो अपने जीवन में पढ़ने से दू’र ही रहीं और उन्हें ये बातें काफ़ी आकर्षित किया करती थीं। पर उन्हें इस ध’र्म की ओर ले जाने वाली कोई और ताक़’त थी।

सरोज ख़ा’न ने बताया कि उन्हें अक्सर सपने आया करते थे जिसमें एक लड़की उन्हें माँ कहकर पुकारा करती थी। वो अक्सर उन्हें म’स्जिद के अंदर से पु’कारा करती थी। ये सपने जब सरोज ख़ा’न को लगातार आने लगे तो उन्होंने मुस्लि’म ध’र्म अपनाने का नि’र्णय किया और अपना ध’र्म परिवर्तन किया। सरोज ख़ा’न का कहना था कि शायद उनकी 8 महीने की बच्ची ही उन्हें इस तरह से सपनों में नज़र आया करती थी।

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