कराची: पाकिस्तान की मशहूर गायिका नैय्यारा नूर का नि’धन हो गया है. 71 वर्षीय नैय्यारा आज़ाद भारत के असम में पैदा हुई थीं. नैय्यारा की गायकी के दीवाने भारत में भी बड़ी संख्या में हैं. नैय्यारा ग़ज़ल गायिका में महारत रखती थीं. उनकी गायिकी के आगे सरहद का कोई मतलब नहीं था.

नैय्यारा ने 2012 के बाद कभी गायिकी नहीं की. इसका कारण उनकी उम्र और ख़राब सेहत को माना गया. नैय्यारा नूर का नि’धन ग़ज़ल गायिकी के क़द्रदानों के लिए बड़ा झ’टका है. बीमारी से संघर्ष कर रहीं 71 वर्षीय नईयारा नि’धन होने के बाद परिवार ने रविवार को कहा, भारत और पाकिस्तान की साझा संस्कृति की प्रतिनिधि नैय्यारा के नि’धन से अंतिम संगीत आइकॉन के जीवन पर पर्दा गिर गया।

लम्बे समय से नैय्यारा उनका इलाज कराची में चल रहा था. उनके भतीजे ने इस बात की जानकारी ट्विटर के ज़रिए दी. उन्होंने ट्वीट किया कि भारी मन के साथ कहना पड़ रहा है कि प्यारी चाची (ताई) नैय्यारा नूर का नि’धन हो गया है। उनकी आत्मा को शांति मिले।

नैय्यारा नूर ने कई शानदार ग़ज़लें गाई हैं. उनकी सुरीली आवाज़ के कारण उन्हें ‘बुलबुल-ए-पाकिस्तान’ की उपाधि दी गई थी। नैय्यारा सन 1950 में असम के शहर गुवाहाटी में पैदा हुई थीं. उनके पिता मुहम्मद अली जिन्ना की पार्टी मुस्लिम लीग के सक्रिय सदस्य थे.

1947 में विभाजन से पहले पाकिस्तान यात्रा के दौरान उनके पिता ने पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की मेजबानी की थी। साल 1958 में नैय्यारा का परिवार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर चला गया। नैय्यारा की मशहूर ग़ज़लों में बहज़ाद लखनवी की रचना ‘ए जज़्बा ए दिल गर मैं चाहूँ’ भी शामिल है.

उन्होंने ‘वो जो हम में तुम में क़रार था’, ‘कभी हम ख़ूबसूरत थे’ जैसे तमाम शानदार गीत गाये. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ ने नैय्यारा के नि’धन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी मृ’त्यु संगीत जगत के लिए “एक अपूरणीय क्षति” है। ग़ज़ल हो या गीत, नय्यरा नूर ने जो भी गाया, उसने उसे पूर्णता के साथ गाया। नय्यरा नूर के नि’धन से जो शून्य पैदा हुआ है, वह कभी नहीं भरा जा सकेगा।’

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