संगीत की दुनिया में कुछ नाम ऐसे हैं जिनको पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। जब भी कभी इन गायकों का नाम आएगा तो लोग खड़े होकर तालियां बजाने लगेंगे। इनमें बॉलीवुड सिंगर लता मंगेशकर, मो’हम्मद रफी जैसे गायकों का नाम शामिल है। लेकिन आज हम बात कर रहे हैं भारतीय शास्त्रीय गायक उस्ताद गु’लाम सादिक खा’न के बारे में, आपको बता दें कि वह भारतीय सारंगी वादक उस्ताद गु’लाम जाफर खा’न के बेटे थे। जब वह 9 साल के थे तब उस्ताद गु’लाम जाफर खा’न ने खुद उन्हें संगीत में दीक्षित किया था।

जिसके बाद उनकी मेहनत की देखते हुए उनको उस्ताद मुश्ताक हुसैन खा’न के पास भेज दिया गया और वही से उन्होंने अपने संगीत को जारी रखा। उस्ताद गु’लाम सादिक खा’न ने अपने शुरुआती करियर में करीब 10 से 12 साल सं’घर्ष किया। वह पहले लोगों के पास जा जा कर अपना हुनर दिखाते थे और उनको हर जगह बताना पढ़ता था कि वह कौ’न हैं।

लेकिन जब उनको पहचाना जाने लगा तो लोग उनके पास आते थे। उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कोने कोने में अपने हुनर से लाखों लोगों का दिल जीता है। वह भारत समेत यूके, ऑस्ट्रेलिया, साऊदी अरब, ओमान जैसे देशों में भी अपने हुनर का प्रदर्शन कर चुके हैं। आपको बता दें कि साल 2005 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है।

गोरतलब हैं कि वह 22 अगस्त को उत्तर प्रदेश के रामपुर में जन्में थे और वह रामपुर-सहसवान घराने से ताल्लुक रखते हैं। उनके परिवार के कई लोगों को पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। बता दें कि साल 2016 में आज ही के दिन गु’लाम सादिक खा’न का 76 वर्ष की आयु में दुनिया को अलवि’दा कह गए थे। लेकिन अपने पीछे छाप छोड़ते हुए उन्होंने जसपिंदर नरूला और उनके बेटे, उस्ताद गुलाम अब्बास खा’न जैसे गायकों को शिक्षा दी।

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