ला’वारिस की तरह ठेले पर पहुँची थी श्म’शान, द’र्दना’क है इस एक्ट्रेस की कहानी…

कहते हैं ये फ़िल्म इंडस्ट्री किसी को सिर मा’थे बि’ठाती है तो उसे ही गु’मना’मी के अं’धेरे में भी ध’के’ल देती है।यहाँ आने के सभी के अल’ग-अल’ग रास्ते हो सकते हैं लेकिन किसका सिता’रा च’मकेगा और किसका नहीं ये फ़ै’सला तो शायद क़िस्मत ही करती है।किसी को अपनी पहली फ़िल्म से ही कामयाबी मिल जाती है तो कोई कामयाबी के लिए सालों तर’सता है। वैसे ये भी ज़रूरी नहीं कि जिसे पहली ही बार में कामयाबी मिल गयी उसकी कामयाबी पक्की है।

आज हम ऐसी ही एक अभिनेत्री की कहानी आपको सुनाने आए हैं जो अपनी पहली ही फ़िल्म से लोगों के दिलों में ब’स गयी। पर जब उसका अं’त हुआ तो इतना गु’मनामी भरा था कि उनके श’व को कोई अपना कहने वाला भी नहीं था। आपको ये जा’नकर आश्चर्य होगा कि अं’तिम या’त्रा में एक ठे’ले पर श’व को ले जाया गया था।

हम जिनकी बात कर रहे हैं वो है ‘हमरा’ज़’ फ़िल्म से फ़िल्मी दुनिया में क़’दम रखने वाली विम्मी। पहली ही फ़िल्म से अपनी एक पहचा’न बना चुकी थीं वो, सुनील दत्त के साथ परदे पर विम्मी की अदा सभी को भा गयी। ग़ै’र फ़िल्मी बैकग्राउंड से आयी विम्मी मुंबई के सो’फ़िया कॉलेज से मनोविज्ञान पढ़ चु’की थीं और एक गा’यिका के तौर पर ऑल इंडिया रेडियो के कार्यक्रमों में शामिल रहा करती थीं।

संगी’तकार रवि के ज़रिए बी आर चोपड़ा से मि’ली और फ़िल्मी दुनिया में आ गयीं। फ़िल्मों में आना जितना आ’सान था उतना ही मु’श्किल था टि’के रहना। बी आर चोपड़ा विम्मी की स’मझदारी और जल्द से जल्द बात समझ लेने के गुण के क़ा’यल थे। फिर भी उन्होंने विम्मी को दु’बारा का’स्ट नहीं किया। विम्मी अलग-अलग फ़िल्मों में भाग्य आ’ज़माती रहीं लेकिन मानो भाग्य उन्हें आ’ज़मा रहा था। सफलता उनके हाथों से कोसों दू’र थी।

1971 में शशि कपूर के साथ आयी ‘पतंगा’ ने कुछ राह’त दी लेकिन इसके बाद भी बात नहीं बनी। विम्मी न सिर्फ़ अभिनय बल्कि अपने स्टाइल के लिए भी जानी जाती थी। उस दौर में उन्होंने बेहद बो’ल्ड अवता’र भी धरे। एक फ़ोटोशू’ट के लिए बिकनी पहनने की हि’म्मत भी विम्मी ने दिखायी।पर करियर न चलना था सो न च’ला।

फ़िल्मों में आने से पहले ही वि’म्मी ने परिवा’र के लोगों की ना’राज़’गी के बाद भी प्रेम वि’वाह कर लिया था।जब फ़िल्मों में आयीं तो परिवा’र का साथ नहीं था और घर पर पति और दो बच्चे ज़रूर थे।फ़िल्मी दुनिया की चकाचौं’ध ने इस परिवा’र से भी एक दू’री बना दी थी। लगाता’र फ़्लॉ’प होती फ़िल्मों के बीच विम्मी ने ब’यान दिया कि वो फ़िल्में पैसों के लिए नहीं करतीं उनके पास पहले से ही बहुत कुछ हैं।ये बात उनके स्टाइल से सच भी मा’लूम होती थी।

दरअसल विम्मी एक फ़िल्मी दला’ल के साथ रहकर करियर बनाने में लगी थीं। दलाल ने उनका हर तरह से शोष’ण किया और 7 साल में ही करियर ख़’त्म होने की कगा’र पर था। जब दौ’लत कम होने लगी तो स्टाइल, महँगी गाड़ियाँ और साथी लगने वाला वो व्यक्ति भी साथ छो’ड़ गया। कहा जाता है कि विम्मी गुज़ा’रे के लिए उस दौर में कॉल गर्ल बनने पर मज’बूर हो गयीं।

श’राब की ऐसी ल’त लगी जो छू’टती न थी। एक ओर पैसे की तं’गी और दूसरी ओर ल’त। सस्ती ज़’हरी’ली श’राब ने पूरे शरीर को खो’खला कर दिया। दिल की बीमा’रियों ने घे’रा और 34 साल की उम्र में ही विम्मी ने द’म तो’ड़ दिया।उस समय तक वो गु’मना’मी के अं’धेरों में खो चु’की थीं। अं’तिम समय में उन्हें कोई पहचा’नता नहीं था।

जब विम्मी की मौ’त हुई तो उस समय वो अके’ली थीं। नानावटी अस्प’ताल के जनरल वार्ड में एक गु’मना’म मौ’त को गले लगाया। कोई उन्हें जा’नने वाला भी उनके साथ मौजूद नहीं था। एक ठेले पर उनका श’व रखकर श्म’शान ले जाया गया था।फ़िल्मी दुनिया की च’काचौं’ध में विम्मी ने सबको भू’ला दिया और ख़ुद भी भु’ला दी गयीं।

आपको ये जा’नकर है’रानी होगी कि विम्मी के दो बच्चों में से उनके बेटे भी अब एक बड़ी प्रसिद्ध हस्ती बन चु’के हैं। विम्मी के पति कलकत्ता के एक बड़े व्यवसायी थे और उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी तरह पढ़ाया लिखाया। उनके बेटे रजनीश ने पढ़ाई के बाद अच्छी कम्पनी में काम करना शुरू कर दिया था लेकिन बाद में आ’ध्या’त्म की ओर मु’ड़ गए। आज वो रजनीश के नाम से मशहूर हैं।

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