मुम्बई: सुशांत सिंह राजपूत के केस की गुत्थी ऐसी उलझी है कि अब जब कोई कहता है कि गुत्थी सुलझ रही है तो समझ नहीं आता कि सुलझ रही है या कि और उलझ रही है. हर रोज़ नई बातें, नए आरोप, नए दावे क्या कुछ हो रहा है. कई बार तो एक बात का दूसरी बात से कोई कनेक्शन भी नहीं होता. कौन सी बात सच है और कौन सी बात हवा में है, अब ये भी समझ नहीं आता.

सुशांत केस की जाँच पहले मुंबई पुलिस कर रही थी, फिर बिहार पुलिस भी करने लगी, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जाँच के लिए कह दिया, प्रवर्तन निदेशालय के बाद अब जाँच NCB तक पहुँच चुकी है. देखा जाए तो अब मुंबई पुलिस और बिहार पुलिस मामले से बाहर हो चुके हैं लेकिन जो पहले चल रहा था वही अब भी चल रहा है. लगातार पूछताछ हो रही है लेकिन अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

सबसे ज़्यादा आरोप रिया चक्रवर्ती पर लग रहे हैं लेकिन जाँच एजेंसियां रिया को भी गिरफ़्तार नहीं कर रही हैं. जानकार मानते हैं कि मीडिया में भले कुछ चल रहा हो लेकिन अभी तक किसी भी जाँच एजेंसी को रिया के ख़िलाफ़ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. शायद यही वजह है कि रिया अब कैमरा के सामने आकर अपना पक्ष रख रही हैं जिससे कि उनका पक्ष भी मीडिया में आये. रिया ने हाल ही में टीवी मीडिया को इंटरव्यू दिए हैं जिनमें उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया.

उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए हैं, इनमें कुछ ऐसे सवाल भी हैं जो मीडिया उनसे पहले से कर रहा है. रिया के इंटरव्यू देने के बाद सुशांत के परिवार की ओर से तीख़ी प्रतिक्रिया आयी है. इस मुद्दे पर अब सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह ने प्रतिक्रया दी है. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से कहा है कि मेरा गंभीरता से मानना है कि जिन लोगों पर अपराधिक आरोप लगा हो, उनकी मीडिया पब्लिसिटी पर रोक लगना चाहिए. उन्होंने साथ ही कहा कि अगर आरोपी निर्दोष है तो इससे उसकी प्रतिष्ठा धूमिल होती है और अगर दोषी है तो उसे बे-वजह की पब्लिसिटी मिलती है.
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विकास सिंह की बात ठीक तो है लेकिन मीडिया में जिस तरह से रिया के ख़िलाफ़ बातें चल रही हैं ऐसे में वो अगर सामने आकर अपना पक्ष रख रही हैं तो उनके नज़रिए से देखा जाए तो ठीक भी है. कुल मिलाकर जब इस मामले में जाँच एजेंसियां काम कर रही हैं तो मीडिया को चाहिए कि अपना टोन डाउन करे और अदालत के फ़ैसले का इंतज़ार करे.

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