कँगना रनौत पिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय हैं और आये दिन वो कुछ ऐसा कह जाती हैं जो विवादों में आ जाता है. कँगना के बारे में कुछ लोगों का कहना है कि वो दूसरों को ट्रोल करके मज़े लेने वाली फ़ेहरिस्त में आ गई हैं और अब उनसे संजीदा बातें नहीं होती हैं. पिछले दिनों वो महाराष्ट्र सरकार से चिढ़ी हुई थीं तो उसके पहले सुशांत केस में भी बिना तथ्यों के बातें कर रही थीं. हालत अब इस स्तर तक पहुँच चुकी है कि कँगना ख़ुद ट्रोलिंग शुरू करने लगी हैं.

ताज़ा मामला उनके एक यूज़र की प्रोफाइल पर जाकर कमेन्ट करने का है. एक यूज़र के ट्वीट पर जोकि कँगना के बारे में भी नहीं था, उस पर जाकर कँगना रानौत कुछ ऐसा लिख दिया जो बिलकुल अजीब तरह की बात थी. एक लड़की के ट्वीट पर कँगना ने लिखा,”अपनी हालत तो देखो, कुछ लेती क्यों नहीं? स्वघोषित सुसाइडल हो। ज़हरीली हो। देखने में डरावनी भी। ऐसी कौन सी कमी है, जो आप में नहीं है। मुझे ज्ञान मत दो, मुझसे ज्ञान लो। जल्द से जल्द अपना हेयरस्टाइल बदलो और ध्यान लगाओ।”

कँगना ने जिस प्रकार बॉडी-शेमिंग करते हुए कमेन्ट किया उससे ज़ाहिर है कि अब वो ट्रोल करने वालों की श्रेणी में अपना नाम स्पष्टता से दर्ज करा चुकी हैं. कँगना के इस बेतुके कमेन्ट पर यूज़र ने लिखा- Go F*** Yourself, अब इस पर भी कँगना जवाब देने पहुँच गईं और लिख दिया- ‘नहीं, नहीं। मैं हॉट और का’मुक हूं। मैं यह काम ख़ुद नहीं करती’. उनके इस बयान पर उनकी आलोचना हो रही है और लोग ये कह रहे हैं कि वो कभी तो अपने आपको हिन्दू धर्म की रक्षक बताती हैं और कभी ऐसी बातें करती हैं जो एक सच्चा हिन्दू कभी नहीं करेगा.

इस पर भी कँगना ने ट्वीट कर दिया और लिख दिया-यह देखकर मज़ा आ रहा है कि किस तरह सभी अवसादग्रस्त और आत्महत्या की प्रवृत्ति रखने वाले तुच्छ फेमिनिस्ट विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों को लेकर तौबा-तौबा कर रहे हैं। इनमें से कुछ लोगों ने इस बात का बतंगड़ बना दिया कि पद्मश्री सम्मान प्राप्त शख़्स शारीरिक संबंधों की बातें कर रही है। औरतों की कामुकता के प्रति विक्टोरियन और इस्लामिक दृष्टिकोण के साथ आख़िर यह हो क्या रहा है, बर्फ़ के महीन कण मेरी टाइमलाइन पर आकर पिघल रहे हैं।

अब तो लोग यहाँ तक कह रहे हैं कि कँगना रानौत को कोई और ट्रोल नहीं कर रहा है बल्कि वो ख़ुद ट्रोल होने के लिए आगे आ रही हैं. बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं कि इंसान को कम बोलना चाहिए क्यूँकि जब हम ज़्यादा बोलते हैं तो न चाहते हुए कुछ ऐसा बोल जाते हैं जिसका कोई सर-पैर नहीं होता है.

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