एक समय में बॉलीवुड के ख’लनायक के नाम से मशहूर नायक संजय दत्त ने अपने जीवन में बहुत कुछ स’हा। उनकी ज़िंदगी की कहानी इतनी फ़िल्मी कहानी के जैसी है कि उनकी ज़िंदगी पर एक फ़िल्म भी बन गयी है। संजय दत्त अपने घर में ह’थियार रखने के कारण आ’र्म्स एक्ट के तहत जे’ल की स’ज़ा भी भु’गत चु’के हैं। उन्हें पाँच साल की स’ज़ा हुई थी और उन्होंने वो समय जे’ल में बिता लिया है। अब वो अपने परिवार के साथ ख़ुश हैं। वैसे संजय को इस बात का म’लाल तो है कि उनके बच्चों को देखने के लिए उनके साथ उनकी माँ नहीं हैं।

संजय दत्त से जब ये पूछा गया कि उन्होंने अपना जे’ल का समय कैसे निकाला तो इस पर उन्होंने बताया कि ये बहुत मुश्कि’ल समय था। संजय बताते हैं कि समय मुश्कि’ल ज़रूर था लेकिन एक हवलदार की बात ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। इस बारे में संजय ने बताया था कि “जब मैं जे’ल में था तब एक हवलदार ने मुझसे कहा कि संजू बाबा अगर आपने उम्मीद करना छो’ड़ दिया तो जे’ल का समय चुटकियों में निक’ल जाएगा। मैंने उससे पूछा। कि मैं उम्मीद कैसे छो’ड़ सकता हूँ। उन्होंने बोला कि कोशिश करो। मैंने उनकी बात को ग’म्भीरता से लिया और कोशिश की”।

आगे संजय ने बताया कि “मुझे दो-तीन हफ़्ते लगे और मैंने उम्मीद छो’ड़ दी। मैं सही बता रहा हूँ जब ये हो गया तो समय तेज़ी से निक’ल गया”। संजय जेल के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि “मैंने जेल में 5-6 हज़ार रुपए क’माए थे। अपनी पत्नी को दिया। है। थैली बनाना, गार्डेन में काम करना, रेडीयो में काम करना, ये सब सीखने का काम है। वो वक़्त सीखने का था भी”। संजय ने अपनी मेहनत से और अच्छे स्वभाव से जे’ल की ये स’ज़ा पूरी की।

संजय ने जे’ल से जुड़ा एक क़िस्सा भी बताया था। वो बड़े भाई होने के नाते अपनी बहनों को हर राखी में कुछ न कुछ तोहफ़ा दिया करते थे। जब वो जेल में थे तब उनकी बहन प्रिया राखी बाँ’धने पहुँची थी। संजय के पास देने के लिए कोई क़ीमती तोहफ़ा तो नहीं था। उन्होंने जे’ल में काम कर- करके दो- दो रुपए के कू’पन क’माए थे। किसी तरह संजय ने प्रिया को यही दो कूपन दिए थे। प्रिया दत्त ने अब तक उन कूपन को सम्भा’ल कर रखा है।

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