बॉलीवुड में हर साल कुछ अच्छी और कुछ कम-अच्छी फ़िल्में आती हैं लेकिन इनमें से कुछ ही ऐसी रहती हैं जो काफ़ी समय तक सिनेमा पर अपना प्रभाव छोड़ती हैं. आज हम ऐसी ही एक फ़िल्म की बात करेंगे. सन 2003 में आयी फ़िल्म ‘जि’स्म’ बॉलीवुड इतिहास की सबसे बो’ल्ड फ़िल्मों में से एक मानी जाती है. अमित सक्सेना के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म से जॉन अब्राहम ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत की थी लेकिन फ़िल्म की असली हीरो बिपाशा बासु थीं.

एमएम कीरावानी के संगीत से सजी इस फ़िल्म की थीम बेहद बो’ल्ड थी. फ़िल्म के कुछ डायलॉग जैसे ‘ये जि’स्म प्यार करना नहीं जानता, ये जानता है सिर्फ़ भूक, जि’स्म की भूक’ और ‘मेरा दिमाग़ मेरे जि’स्म का ग़ुलाम हो गया था’. ‘जि’स्म’ की बो’ल्ड थीम ने उस समय लोगों का ध्यान खींचा तो इसके संगीत ने लोगों को अपना दीवाना बना दिया. ‘आवारापन, बंजारापन’,’जादू है नशा है’, ‘चलो तुमको लेकर चलें’, और ‘मेरे ख़्वाबों का’ जैसे गीत लोगों की ज़बान पर चढ़ गए.

फ़िल्म के संगीत ने इसको आम लोगों तक पहुँचाया तो इसकी बो’ल्ड थीम के किरदार में बिपाशा ने जैसा काम किया वो क़ाबिल ए तारीफ़ रहा. फ़िल्म में कई ऐसे जज़्बाती सी’न थे जिसने लोगों को अपनी ओर बाँध के रखा. फ़िल्म के छोटे से छोटे किरदार ने अपनी भूमिका को अच्छे से अदा किया. जानकार मानते हैं कि ‘जि’स्म’ की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा कारण इसका संगीत और इसके जज़्बाती सी’न थे लेकिन इसने बॉलीवुड के निर्मातों के मन में ये बात डाल दी कि अगर बो’ल्ड थीम लेकर उसमें कुछ सेमी-अश्ली’ल सी’न डाल दिए जाएँ तो फ़िल्म का हिट होना तय है.

कई साल इसी रस्ते पर इंडस्ट्री चलती हुई दिखी. 2003 की जनवरी में ‘जि’स्म’ आयी थी तो जून तक मल्लिका शेरावत की ‘ख्व़ाहिश’ आ गई. अभिनेत्री नेहा धूपिया ने तो एलान कर दिया कि बॉलीवुड में शाहरुख़ ख़ान और से’क्स ही बिकता है. असल में नेहा धूपिया ने भी ‘जूली’ और ‘शीशा’ जैसी फ़िल्मों में जमकर अं’ग-प्रदर्शन किया. एक समय तक इस तरह की फ़िल्मों से पैसा कमाया भी गया लेकिन जल्द ही निर्माताओं को ये सबक़ मिल गया कि बिना कहानी के कोई भी फ़िल्म चलने वाली नहीं है.

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