इस बात पर संजय दत्त फू’ट- फू’ट कर रो प’ड़े, “मुझे ल’गा कि मैं कमज़ो’र..”

कहते हैं सभी के जीवन में एक ऐसा समय भी आता है जब वो ख़ुद को बहुत कमजो’र समझता है। एक ऐसा ही मौ’क़ा आया था संजय दत्त की ज़िंदगी में भी। यूँ तो संजय दत्त की जिंदगी कई उता’र- च’ढ़ाव से भरी रही है।उनकी ज़िंदगी में जब उन्होंने अपनी सारी ग़ल’तियों की स’ज़ा पूरी कर ली और अपने परिवार के साथ ख़ुश रहने लगे तभी एक बड़ी मु’श्किल ने द’स्तक दी।

लॉ’कडा’उन के दौरान उनकी ज़िंदगी में एक बड़ा तू’फ़ान आया। संजय दत्त ने बताया कि एक रोज जब वो सीढ़ियाँ चढ़कर आए तो उनकी साँस बु’री तरह फ़ू’ल गयी थी। बाद में वो नहाने लगे तो भी उनकी साँस इसी तरह च’ढ़ने लगी। डॉक्टर को दि’खाने पर पता चला कि उनके फेफ’ड़ों में पानी भर गया है। बाद में जाँ’च के बाद पता चला कि उनके आ’धे फेफ’ड़ों में पानी भर गया है।

पहले लगा कि उन्हें TB हुई है लेकिन टे’स्ट के बाद पता चला कि उन्हें कैं’सर हुआ है। संजय दत्त ने बताया कि उन्हें जिस तरह से कैं’सर होने की जा’नकारी दी गयी थी वो ग़ु’स्सा दि’लाने वाली थी।आगे उन्होंने बताया कि “उस समय मेरी बहन आयी हुई थी। तो मैंने उसे कहा कि मुझे कैं’सर हो गया है, अब क्या करें?इसके बाद सबने बात की कि क्या किया जा सकता है। फिर भी मैं अपने बच्चों, पत्नी और अपनी जिंदगी के बारे में सोच रहा था”।

आगे संजय ने बताया कि “ये सब सोचते हुए मैं दो-तीन घंटे तक खूब रो’या।उसके बाद मुझे लगा कि मैं कमजो’र नहीं प’ड़ सकता। US में इला’ज कराने की सोचे तो वी’ज़ा नहीं मिला।मैंने कहा यहीं इलाज होगा।राकेश रोशन ने अपने डॉक्टर का नम्बर दिया उनसे मिला। डॉक्टर ने कहा कि आपको उ’ल्टी होगी, बाल उ’ड़ जाएँगे और भी बहुत कुछ होगा। मैंने डॉक्टर से कहा कि मेरे बाल नहीं उ’ड़ेंगे। इस बात पर वो भी हँसने लगी।

संजय ने बताया कि वो की’मियोथे’रेपी के लिए दुबई जाते थे और फिर बैं’डमिं’टन को’र्ट जा’कर दो- तीन घंटे खेलते थे। संजय ने कहा कि “ये पा’गलप’न था लेकिन मैं ऐसा किया करता था। मुझे पु’राना संजय दत्त वापस चाहिए”। आ’ख़िर वा’क़ई संजय दत्त ने इस बीमा’री को मा’त दे दी और आज एक बार फिर अपने करियर में काफ़ी अच्छा कर रहे हैं।

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