अक्सर ये देखा जाता है कि बॉलीवुड में काम किए लोग वक़्त बीतने के साथ कई बार एक अकेलेपन का जीवन जीते हैं कइयों की तो माली हालत ऐसी हो जाती है कि उनके पास अपनी ख़’राब सेहत के लिए भी कुछ करने का पैसा नहीं होता। कुछ ऐसा ही हुआ है बॉलीवुड में मेहंदी, फ़रेब, दिल ने फिर याद किया जैसी फ़िल्मों में मुख्य भूमिका निभा चुके फ़राज़ ख़ान के साथ। बेटे दिन पूजा भट्ट ने ट्वीट करके ये जानकारी दी कि फ़राज़ ब्रेन इंफ़ेक्शन और निमोनिया के कारण फेफड़ों के इंफ़ेक्शन से जूझ रहे हैं और उनकी हालत नाज़ुक है। पूजा भट्ट ने लिखा “उन्हें पैसों की ज़रूरत है उनकी मदद कीजिए, मैंने अपनी ओर से मदद की है। अगर आप भी मदद करें तो अच्छी बात होगी”

फ़राज़ की ओर से फ़ंड माँगने की शुरुआत उनके परिवार के लोगों ने की है और उसमें लिखा गया है कि “फ़राज़ को क़रीब साल भर से कफ और फेफड़ों के इंफ़ेक्शन की शिकायत है, इस महामारी के दौरान उनकी खाँसी बढ़ती गयी तो उन्होंने डॉक्टर से विडीओ कॉल के ज़रिए बात की। 8 अक्टूबर 2020 को हुई इस बात में डॉक्टर ने उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती होने की सलाह दी। डॉक्टर का कहना था कि उनकी हालत बिगड़ सकती है, इसलिए ऐम्ब्युलन्स मंगवाकर उन्हें एडमिट करने के लिए अस्पताल ले जा रहे थे लेकिन उसके बाद जो हुआ उसने हमें हैरान कर दिया”

Faraaz Khan
आगे लिखा है “ऐम्ब्युलन्स रास्ते में ही थी कि इसी बीच फ़राज़ को दौरा पड़ा और वो बुरी तरह हिलने लगे उन्हें सम्भालना मुश्किल था। ऐम्ब्युलन्स के आते ही जब फ़राज़ को स्ट्रेचर की सहायता से उन्हें ऐम्ब्युलन्स में चढ़ाया जा रहा था कि उन्हें दूसरा दौरा पड़ा। ऐम्ब्युलन्स से उन्हें जल्दी ही बैंगलोर के विक्रम हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ ऐम्ब्युलन्स में ही उन्हें तीसरा दौरा पड़ा। फ़राज़ को एमर्जेंसी वार्ड में भर्ती किया गया, जहाँ हमें पता चला कि उन्हें ये तीन दौरे ब्रेन में इंफ़ेक्शन की वजह से हुए जो उनकी खाँसी और फेफड़ों के इंफ़ेक्शन के कारण फैला है।”

इस फ़ंड रेज़र में आगे लिखा है, “इस सीज़र के दौरान ही उन्हें फेफड़ों में कफ़ भरने के कारण निमोनिया भी हो गया, जिसके कारण उनकी हार्टबीट और ब्लड प्रेशर इतना बढ़ गया कि वो साँस भी नहीं ले पा रहे थे। अभी फ़राज़ को ICU में रखा गया है किसी तरह कई सरय दवाओं और इलाज के ज़रिए उन्हें स्टेबल किया गया है। अब तक हमें 1.8 लाख रुपए मिले हैं लेकिन हमें 25 लाख तक की ज़रूरत हो सकती है। फ़राज़ को अस्पताल में क़रीब 7 से 10 दिन रहने की ज़रूरत हो सकती है।