आज के दौर के ए लिस्टर में शुमार किए जाने वाले अक्षय कुमार एक समय मुश्किल में थे. ‘खिलाड़ी’ कुमार के नाम से जाने जाने वाले अक्षय की अदाकारी शुरू से अच्छी मानी गई लेकिन उनके करीयर में एक ऐसा वक़्त आया जब उन्होंने लगातार 17 फ्लॉप फ़िल्में दे दीं. अमृतसर में जन्मे अक्षय कुमार के लिए ये बहुत मुश्किल दौर थे. अधिकतर फ़िल्म-मेकर उनसे बचने लगे थे. कुछ विश्लेषक कहते थे कि वो फ़िल्मों का चुनाव ठीक से नहीं करते तो ये भी चर्चा ख़ूब रहती थी कि वो अन-लकी हैं.

इन 17 फ़िल्मों के बीच में ‘दिल तो पागल है’ जैसी सुपर डुपर हिट फ़िल्म आयी लेकिन उसमें उनका साइड रोल था और इस फ़िल्म की कामयाबी का सारा श्रेय शाहरुख़ ख़ान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर को मिला. इन 17 फ़िल्मों में उनकी ‘संघर्ष’ भी शामिल थी जिसमें उनके रोल की तारीफ़ तो बहुत हुई लेकिन फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल न दिखा सकी. यही वो समय था जब उन्हें लगा कि वो फ़िल्मी दुनिया में कामयाब नहीं हो सकेंगे और वो कनाडा बसने की सोचने लगे.1999 में उनकी फ़िल्म ‘जानवर’ जब आयी तो उसमें उनकी अदाकारी की तारीफ़ हुई लेकिन इसे बहुत अच्छी स्टार्ट नहीं मिली.

आनंद-मिलिंद के संगीत से सजी इस फ़िल्म के गाने धीरे-धीरे बहुत पॉपुलर हो गए. धीमी स्टार्ट के बाद फ़िल्म ने अचानक रफ़्तार पकड़ ली और अक्षय के डूबते करीयर को सहारा मिला. हालाँकि ‘जानवर’ छोटे सेंटर्स पर ही ज़्यादा पॉपुलर रही जबकि बड़े सेंटर्स पर फ़िल्म को ख़ास कामयाबी न मिली. अक्षय कुमार के करीयर को लेकिन फिर से उठाने का काम किया प्रियदर्शन की कल्ट-क्लासिक कॉमेडी ‘हेरा फेरी’ ने. इस फ़िल्म ने परेश रावल को भी स्थापित किया और सुनील शेट्टी को भी अलग पहचान दी.

‘हेरा फेरी’ की कामयाबी के बाद अक्षय कुमार को एक और फ़िल्म चाहिए थी और वो फ़िल्म बनी ‘धड़कन’. नदीम-श्रवण के संगीत ने तहलक़ा मचा दिया. ये वो दौर था जब हर तरफ़ ‘धड़कन’ फ़िल्म के ही गाने सुनने को मिल रहे थे. फ़िल्म की कामयाबी का श्रेय अक्षय कुमार, शिल्पा शेट्टी और सुनील शेट्टी तीनों को मिला वहीं महिमा चौधरी को भी एक हिट मिली. अक्षय ने ‘हेरा फेरी’ और ‘धड़कन’ की कामयाबी के बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और कनाडा जाने का ख़याल अपने मन से निकाल दिया. हालाँकि सन 2011 में उन्होंने कनाडा की नागरिकता ले ली.