फ़िल्म निर्माता पर अदाल’त का क’ड़ा फ़ैसला, सुनायी छ महीने की स’ज़ा

फ़िल्म निर्माता भले ही परदे के पीछे का काम सम्भालते हैं लेकिन असल नुक़’सान फ़ायदा तो उनका ही होता है।ऐसे में हर नुक़’सान की भ’रपायी उन्हें करनी ही होती है। दर्शकों की पसंद- नापसंद एक निर्माता के लिए नफ़े नु’क़सान का सौदा होता है। वो तो अपनी सारी पूँजी लगाकर कोई फ़िल्म बनाते हैं। ऐसे में उन्हें किस तरह की परेशा’नियों से दो-चार होना पड़ता है ये वो ही जानते हैं। एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें फ़िल्म निर्माता को अदालत ने छह महीने की स’ज़ा सुनायी है।

ये हुआ है तमिल फ़िल्म निर्माता एन लिंगुसामी के साथ जिन्हें मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने चेक धो’खाध’ड़ी मामले में ये स’ज़ा सुनायी है।उनके ख़ि’लाफ़ वितीय फ़र्म पीवीपी कैपिटल ने माम’ला द’र्ज करवाया था।उनका कहना है कि उन्हें लिंगुसामी ने 1.03 करोड़ का चेक दिया था जो बाउं’स हो गया। लिंगुसामी और उनके भाई सुभाष ने इस कम्पनी से फ़िल्म बनाने के लिए लो’न लिया था। उनकी वो फ़िल्म काम नहीं कर पायी और फ़्लॉ’प हो गयी।

फ़िल्म न चलने के कारण लिंगुसामी अपना क़’र्ज़ चु’काने में अस’फल रहे। इस मामले में पहले पीवीपी कैपिटल ने मद्रास उच्च न्यायालय में अपी’ल की थी। अदालत ने फ़िल्म निर्माता और उनके भाई को क़’र्ज़ की राशि चु’काने का निर्देश दिया था। बाद में जब लिंगुसामी ने चेक दिया तो वो बाउंस हो गया जिसके कारण ये नया मामला द’र्ज हुआ। इस धोखाधड़ी के के’स में लिंगुसामी को छह महीने की स’ज़ा सुनायी गयी है।इससे ब’चने के लिए उन्हें 10 हज़ार की रक़म भ’रनी होगी।

लिंगुसामी का कहना है कि वो उच्च न्यायालय में इसके ख़ि’लाफ़ अपी’ल करेंगे। उनका कहना है कि “विवा’द पीवीपी कैपिटल और हमारे प्रोडक्शन हाउस थिरूपती ब्रदर्स फ़िल्म मीडिया प्रायवेत लिमिटेड के बीच है।माननीय अदालत ने आज उनके द्वारा दायर याचिका पर फ़ै’सला सुनाया है। हम इसके ख़ि’लाफ़ अपी’ल करेंगे और क़ानूनी रूप से इस मुद्दे का सामना करेंगे”। अब इस माम’ले में आगे क्या होता है इस पर सभी की नज़र बनी हुई है। ये फ़ैसला 22 अगस्त को सुनाया गया।

चुग़ली बाज़

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