फ़िल्मी दुनिया के इतिहास पर नज़र डालें तो ऐसे कई अभिनेता और अभिनेत्री हुए जिनको कामयाब माना जा सकता है. बड़े बड़े एक्टर्स का अपना दौर आया लेकिन ये दौर भी वक़्ती होता है तो वो चला भी गया. आज हम आपको एक ऐसे ही वाक़ए के बारे में बताने जा रहे हैं जो दो सुपर स्टार्स से जुड़ा है. दोस्तों फ़िल्म अराधना जब पर्दे पर आयी तो इस फ़िल्म की इस क़दर पॉपुलैरिटी हुई कि राजेश खन्ना रातों रात सुपर स्टार बन गए. कहा जाता है कि उन्होंने जो स्टारडम देखा उनके बाद किसी ने नहीं देखा.

लड़कियां उनकी दीवानी थीं, उनकी कार अगर पार्किंग में खड़ी हो जाती लड़कियां उसको ही चूम जाती थीं और उनकी कार के शीशे लड़कियों की लिपस्टिक से भर जाते थे. उनके साथ काम करने वाली कई अभिनेत्रियों ने इस बारे में बताया है कि लड़कियां उनकी दीवानी थीं.अराधना में उनके साथ काम करने वालीं शर्मीला टैगोर ने भी इस बारे में बताया और कहा कि उन्होंने ऐसा स्टारडम न पहले कभी देखा था और न उसके बाद कभी देखा.

नवम्बर 1969 में रिलीज़ हुई इस फ़िल्म ने राजेश को सुपरस्टार बना दिया. ऐसा सुपरस्टार जैसा भारत में कभी इमेजिन भी नहीं किया गया था. उनसे पहले भी कई बड़े स्टार हुए लेकिन लड़कियों में जो जलवा राजेश का था वो किसी का न था. अराधना ने राजेश की पॉपुलैरिटी को इस क़दर बढ़ा दिया कि अगले हफ़्ते जब उनकी डोली रिलीज़ हुई तो उसको दर्शकों ने हाथों हाथ लिया. कहा जाता है कि लोग अराधना देखकर निकलते और डोली देखने के लिए किसी और थिएटर में घुस जाते.

अगले महीने दो रास्ते आयी और वो भी सुपर हिट हुई. 1970 में उनकी द ट्रेन, ख़ामोशी, सच्चा झूठा, सफ़र और आन मिलो सजना सब हिट हुईं. 1971 जनवरी में कटी पतंग ने भी झंडे गाड़े तो फ़रवरी में महबूब की मेहँदी ने भी हिट का ख़िताब हासिल किया. इसके बाद 12 मार्च 1971 को रिलीज़ हुई फ़िल्म आनंद. आनंद को राजेश के करीयर में मील का पत्थर कहा जाता है, इस फ़िल्म में सहायक भूमिका में थे अमिताभ बच्चन. अमिताभ एक अदद हिट की तलाश में त’ड़प रहे थे जबकि राजेश लगातार हिट पे हिट दे रहे थे.

आनंद की काम’याबी ने राजेश को पूरी तरह स्थापित कर दिया था और ऐसा लगा कि नवम्बर 1969 में एक म’हिला की ज़िन्दगी पर केन्द्रित कहानी वाली अराधना फ़िल्म से काम’याब हुआ ये सुपर स्टार अब कई सालों तक राज करेगा हालाँकि ये बात उतनी सही सिद्ध न हुई. राजेश की पॉपुलैरिटी इस लेवल पर पहुँच चुकी थी कि जब शम्मी कपूर और हेमा मालिनी की फ़िल्म अंदाज़ रिलीज़ हुई जिसमें राजेश का भी छोटा सा रोल था तो भी पोस्टर में उनकी तस्वीर ही नज़र आयी. “ज़िन्दगी इक सफ़र है सुहाना” गाना राजेश पर फ़िल्माया गया था और ये गाना जैसे ही पर्दे पर आता लोग सीटी बजाने लगते. ये भी कहा जाता है कि फ़िल्म में जैसे ही राजेश के किरदार की मौ’त होती है दर्शक बाहर निकलने लगते थे लेकिन अगला शो फिर देखने पहुँच जाते थे.

इसके बाद उनकी छोटी बहु, सीमा, मर्यादा दौर दुश्मन सब ज़बरदस्त हिट रहीं. उन्होंने लगातार 17 हिट फ़िल्में दीं. 1972 की जनवरी में उनकी फ़िल्म अमर प्रेम आयी. उन्होंने 1972 में बावर्ची, अपना देश और जोरू का ग़ुलाम जैसी हिट दीं लेकिन इस साल उनकी फ़िल्में फ्लॉप भी हो रहीं थीं. जोरू का ग़ुलाम के अगले हफ़्ते रिलीज़ हुई मेरे जीवन साथी बुरी तरह पिट गई. राजेश की ये उस दौर की सबसे ब’ड़ी फ्लॉप थी. इसके पहले उनकी दिल दौलत दुनिया पिट चुकी थी.साल का अंत होते होते उनकी फ़िल्म मालिक आयी. मालिक जब आयी तब राजेश की कई फ़िल्में थिएटर में चल रहीं थीं और इस वजह से इसको डिस्ट्रीब्यूटर ही मिलने में परेशानी आ गई कि कौन सी पिक्चर हटाएं, फिर शर्मीला टगोर के साथ उनकी ये फ़िल्म थोड़ी स्प्रिचुअल भी थी.इस वजह से फ़िल्म ब’ड़ी फ्लॉप हुई.

राजेश की पॉपुलैरिटी ग़ज़ब की थी. उन्होंने लगातार 17 हिट दे दी थीं फिर कुछ इक्का-दुक्का फ्लॉप के बाद भी ब’ड़ी हिट देते जा रहे थे. 1973 जनवरी में राजा रानी आयी और एक बार फिर हिट हुई. इसी साल अप्रैल में दाग़ – ए पोएम ऑफ़ लव आयी.यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म में शर्मिला और राखी भी थीं, फ़िल्म हिट रही. जहां एक ओर राजेश खन्ना का सिक्का चल रहा था वहीँ अमिताभ बच्चन अभी भी संघर्ष ही कर रहे थे. 1969 में अपना फ़िल्मी करीयर शुरू करने वाले अमिताभ की डायरी में बस एक ही हिट फ़िल्म लिखी हुई थी और वो थी आनंद जिसमें मुख्य भूमिका में राजेश खन्ना था. आनंद के निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी ने एक बार फिर राजेश के साथ अमिताभ को साइन किया, फ़िल्म थी नमक हराम.

फ़िल्म की शूटिंग जब शुरू हुई तो ऐसा माहौल था कि राजेश सुपर स्टार हैं और अमिताभ कुछ भी नहीं. इस फ़िल्म की शूटिंग तो चल रही थी वहीं दूसरी ओर एक और फ़िल्म पर्दे पर आने को तैयार थी. वहीं निर्देशक प्रकाश मेहरा भी अपना करीयर बनाने की कोशिश में थे और वो अमिताभ को लेकर फ़िल्म ज़ंजीर बना रहे थे. ज़ंजीर में जया भादुड़ी भी थीं. सलीम-जावेद की कहानी और पटकथा वाली ये फ़िल्म 11 मई 1973 को पर्दे पर आयी. फ़िल्म ने पर्दे पर वो कमाल किया जिसके इंतज़ार में अमिताभ पस्त हो चुके थे. इस फ़िल्म ने अमिताभ को “एंग्री यंग मैन” की छवि दे दी. फ़िल्म इस क़दर हिट हुई कि अमिताभ के पास ऑफर्स की भरमार हो गई.

अचा’नक ही नमक हराम की शूटिंग के दौरान फ़ोकस राजेश की बजाय अमिताभ पर शिफ्ट होने लगा. राजेश के क़रीबी मानते हैं कि ये सब अचा’नक से होना उन्हें असहज करता था वहीं अमिताभ को नया नया स्टारडम मिला था. ऐसा नहीं कि अमिताभ की इस बीच आने वाली सभी फ़िल्में हिट ही हो रही थीं या राजेश की सभी फ्लॉप लेकिन मीडिया में अमिताभ को लेकर ज़बरदस्त कवरेज था. देश में भी एक क़िस्म की नाराज़गी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ थी, बढ़ती बेरोज़गारी और ग़रीबों की लाचारी सब सामने थी और ऐसे में राजेश की फ़ील गुड फ़िल्में दर्शकों को जैसे चिढ़ा रही हों. इसी साल मार्च में राजेश ने डिंपल कपाड़िया से शादी भी कर ली थी, इस वजह से उनकी फॉलोइंग लड़कियों में पहले की तुलना में घटी थी.

राजेश की पॉपुलैरिटी बुरी तरह से गिरने लगी, अमिताभ का क्रेज़ लड़कों में बढ़ने लगा. नमक हराम फ़िल्म के प्रीमियर पर भी अमिताभ को ही ज़्यादा इम्पोर्टेंस मिली. नवम्बर में रिलीज़ हुई नमक हराम में अमिताभ की भूमिका सहायक अभिनेता की थी लेकिन मीडिया में उनके ही चर्चे ज़ोर शोर से हुए. फ़िल्म ज़बरदस्त हिट हुई लेकिन राजेश को फ़िल्म के हिट होने से बहुत नुक़सान हुआ. उनका स्टारडम जाता रहा.