मुम्बई: ‘गुल-मकई’ के निर्देशक एचई अमजद ख़ान ने गी’ता और क़ु’रान की प्रतियां बाँ’टने का फ़ैसला किया है. आपको बता दें कि बॉलीवुड में इन दिनों मलाला युसूफ़ज़ई की ज़ि’न्दगी पर बनी इस फ़िल्म की ख़ा’स चर्चा है. इसकी एक वजह तो ये है ही कि ये फ़िल्म पाकि’स्तानी एक्टिवि’स्ट की मुश्कि’ल ज़ि’न्दगी पर आधारित है, दूसरी वजह ये भी है कि फ़िल्म के निर्देशक एचई अमजद ख़ान ने हा’लिया दिनों में नागरिकता संशोध’न अधिनियम और NRC जैसे मु’द्दों पर अपनी बात रखी जिसके बाद उन्हें जान से मा’रने की धम’कियाँ भी मिलीं. अमजद ख़ान CAA और NRC के विरो’ध में प्रदर्श’न कर रहे लोगों के साथ खड़े नज़र आये.

अमजद जामिया मिलिया इस्ला’मिया यूनिवर्सिटी भी गए और JNU भी गए. उन्होंने शाही’न बाग़ में प्रद’र्शन कर रहीं महिलाओं का भी सम’र्थन किया. CAA और NRC के ख़िला’फ़ लिखे गए उनके ट्वीट पर अलग-अलग तरह की प्रति’क्रया देखने को मिली. उनकी बेबा’क टिप’ण्णी का स’मर्थन जहां बहुत से लोगों ने किया वहीँ कुछ लोगों ने उनको ग़ल’त कमेंट्स भी किए. 31 जनवरी को रिलीज़ होने वाली इस फ़िल्म में भी शा’न्ति का पै’ग़ाम देने की कोशिश की गई है.

इन धम’कियों से वो ज़रा भी वि’चलित नहीं हुए. उन्होंने कहा,”इस तरह की धम’कियाँ उन्हें फ़िल्म शुरू करने से लेकर अब तक मिलती रही हैं..कभी मुस्लि’म कट्ट’रपंथी धम’की देते हैं तो कभी हि’न्दू..इन धमकि’यों से लेकिन एक सीख ज़रूर मिलती है कि ये लोग अपने ध’र्म से भ’टके हुए लोग हैं क्यूँकी धर्म में किसी तरह से हिं’सा की बात नहीं है.” अमजद ने कहा कि यही वजह है कि उनकी टीम ने ये फ़ैस’ला किया कि गी’ता और क़ु’रान बाँ’ट कर लोगों तक धर्म का स’च्चा पै’ग़ाम पहुँचाया जाए. अमजद ख़ान कहते हैं कि भारत के आम लोग अमन-पसंद हैं लेकिन राजनी’ति करने वाले लोगों को अमन से गुरेज़ है.

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