मुम्बई: यूँ तो इंसान को चाहिए कि सामाजिक अधि’कारों की बात करे लेकिन आज के दौर में लोग सा’माजिक अ’धिकारों की बात कम और उसके बहाने लोगों पर क’टाक्ष करने में रहते हैं. कोई कैसे कपड़े पहन रहा है, अच्छे पहन रहा है बुरे पहन रहा है..इसी में उनका पूरा मामला रहता है. कुछ इसी तरह की बात सामने आयी लेखिका तसलीमा नसरीन के बारे में. वि’वादित लेखिका नसरीन ने एआर रहमान की बेटी ख़तीजा रहमान के पहनावे पर टिपण्णी की थी.

नसरीन ने उनके बुर्क़ा पहनने पर ऐतराज़ जताया था. उन्होंने कहा था कि ख़तीजा को ऐसे देखकर उन्हें घुटन होती है. उनके इस कमेन्ट के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आने लगीं लेकिन अब ख़ुद ख़तीजा ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने नसरीन को ज़बरदस्त जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि नारीवाद की आड़ में लोगों को नीचा दिखाने की कोशिश बंद होनी चाहिए. बेटी के बाद अब पिता ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दे दी है. एआर रहमान ने मशहूर वेब पोर्टल क्विंट को दिए एक इंटरव्यू में अपनी बेटी का समर्थन किया.

रहमान ने कहा,”मुझे लगता है कि अगर बच्चों को उस तरीक़े से पालेंगे, जिसमें उन्हें हमारी समस्याओं और हमारी परेशानियों के बारे में बता हो. उन्हें पता है कि उन्हें अच्छा और बुरा हमसे विरासत में मिला है. जो है यही है. उनकी अपनी फ़्री विल होती है और उसने ऐसा किया. उसके बाद मैंने अपनी बेटी से इस बारे में पूछा तो कि अगले प्रश्न के बारे में क्या राय है? क्या आप उसका भी जवाब दोगी.” तो उन्होंने कहा, “नहीं डैडी, मैं जवाब दे चुकी.”

ऑस्कर विजेता संगीतकार ने कहा कि वो अपनी मर्ज़ी से बुर्क़ा पहनती हैं. अपने इंटरव्यू में रहमान आगे कहते हैं,”एक धार्मिक चीज से ज्यादा यह मुझे मनोवैज्ञानिक चीज लगती है. एक पुरुष बुर्का नहीं पहनता है. अगर होता तो मैं जरूर पहनता. जाना और खरीदना बहुत आसान है. मुझे लगता है कि यह उनकी स्वतंत्र इच्छा है. क्योंकि वह ऐसी इंसान हैं जो अपनी मेड की मां या उनके किसी रिश्तेदार के अंतिम सं’स्कार में जाती हैं. मैं इस बात से हैरान हो जाता हूं कि वह सामाजिक काम भी बहुत सादगी से करती हैं.”

आपको बता दें कि ख़तीजा ने एक इन्स्टाग्राम पोस्ट लिखकर लेखिका तसलीमा नसरीन को जवाब दिया था. उन्होंने कहा कि मुझे अफ़सोस है अगर आप (तसलीमा) घुटन महसूस करती हैं.. थोड़ा फ़्रेश एयर ले लें..क्यूँकी मुझे घुटन महसूस नहीं होती बल्कि मुझे गर्व महसूस होता है..मैं आपको कहूँगी कि ज़रा गूगल करके पता करें कि असली फेमिनिस्म क्या होता है क्यूँकी इसका ये अर्थ नहीं होता कि आप किसी और औरत को नीचा दिखाएँ और उनके पिता को बीच में लायें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *