मुम्बई: बॉलीवुड फ़िल्मों के नामी निर्देशक बासु चटर्जी का गुरुवार 4 जून को देहांत हो गया. वो 90 साल के थे. बासु ने अपने फ़िल्मी जीवन में ऐसी फ़िल्में बनाईं जिन्हें आप परिवार के साथ देखें भी और उनसे सीखें भी. चमेली की शादी, बातों बातों में, एक रुका हुआ फ़ैसला जैसी फ़िल्में बनाने वाले बासु का जन्म अजमेर में हुआ था. ब्लिट्ज मैगज़ीन में बतौर कार्टूनिस्ट काम करने वाले बासु ने राज कपूर की फ़िल्म तीसरी क़सम में बतौर सहायक निर्देशक काम किया.

बतौर निर्देशक उनकी पहली फ़िल्म ‘सारा आकाश’ आयी. इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर का स्क्रीनप्ले अवार्ड भी मिला. ‘पिया का घर’, ‘रजनीगन्धा’,’छोटी सी बात’, जैसी फ़िल्मों से बासु ने अपनी पहचान एक संजीदा निर्देशक की बनाई जो बदलते दौर में अपना रंग बदलने को तैयार न था. बासु ने अपनी फ़िल्मों को सच्चाई के क़रीब रखा. उन्होंने अपने करीयर में कई फ़िल्मों का निर्देशन किया और उनमें से अधिकतर फ़िल्मों की सराहना हुई. ‘चमेली की शादी’ फ़िल्म में उन्होंने ज़ात-पात की खाई पर हँसी-मज़ाक़ के अंदाज़ में चो’ट की.

1978 की फ़िल्म ‘स्वामी’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड मिला. बासु को कुल सात बार फ़िल्म फ़ेयर का पुरूस्कार मिला. 1992 में उन्हें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरूस्कार से भी सम्मानित किया गया. बासु की आख़िरी हिंदी फ़िल्म सन 20 =08 में आयी ‘कुछ खट्टा कुछ मीठा’ थी.सन 2011 में आयी त्रिशंकु उनके निर्देशन में बनी अंतिम फ़िल्म थी, ये बंगाली भाषा की फ़िल्म थी.आज बासु दा हमें छोड़कर चले गए हैं. बासु चटर्जी का अंतिम संस्कार मुंबई के सान्ताक्रुज़ शमशान घाट में हुआ.

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