कई आलोचनाओं के बाद भी शाहिद कपूर की हालिया फ़िल्म कबीर सिंह ने बॉक्सऑफ़िस पर अच्छी कमाई दर्ज की है और इस बात ने अपने करियर में लगातार फ़्लॉप फ़िल्मों का स्वाद चखने वाए शाहिद कपूर के तेवर बदल दिए हैं। एक ओर तो उन्होंने अपनी फ़ीस रातोंरात बढ़ा दी है, वहीं आए दिन उनके बयान भी ये साबित करते हैं कि सफलता उनके सर चढ़कर बोलने लगी है।

हाल ही में एक इंटर्व्यू के दौरान शाहिद ये बोलते नज़र आए कि असली हीरो वो नहीं होता जो नियम क़ानून और मान्यताओं का पालन करे बल्कि असली हीरो तो वो होता है जो अपने नियम क़ानून और मान्यताएँ बनाता चले। इसके लिए उसे किसी भी हद तक जाना पड़े वो जाए। इस तरह के बयान से लगता है कि शाहिद ने न सिर्फ़ महिला विरोधी फ़िल्म में काम किया है बल्कि उनकी विचारधारा भी कुछ उसी तरह की है।

शाहिद की बात पर ग़ौर किया जाए तो वो समाज में फैल रही अमानवीयता का समर्थन करते नज़र आ रहे हैं। एक ओर सवाल ये भी उठता है कि क्या शाहिद का एक कलाकार के तौर पर अपने चाहने वालों के बीच ग़लत संदेश भेजना सही है?..बहरहाल उसी इंटरव्यू में शाहिद का एक और जवाब सुनकर ये पता चलता है कि शाहिद की नज़र में समाज के हीरो की पहचान कैसी है? शाहिद ने कहा कि उन्हें इसी तरह के किरदार भाते हैं फिर चाहे वो कमीने हो या हैदर, उड़ता पंजाब हो या R राजकुमार, शाहिद को इसी तरह के किरदार भाते रहे हैं।

Shahid Kapoor

पहले जिस तरह की इमेज शाहिद की रही जो फ़िल्म विवाह, इश्क़-विश्क़ में नज़र आयी शाहिद वैसे किरदारों से कोसों दूर रहना चाहते हैं और उन्हें कबीर सिंह जैसे किरदार निभाना ही अच्छा लगता है। इक एक कारण ये भी हो सकता है कि एक समय से शाहिद की वही फ़िल्में ज़्यादा सफल रही हैं जिनमें उन्होंने एंटी हीरो वाले रोल निभाए।

वैसे शाहिद ने अपने इस विचार का बोझ भी दर्शकों पर लादते हुए कहा कि दर्शक इसी तरह की फ़िल्में देखना पसंद करते हैं। शाहिद ने दर्शकों को समझदार भी कहा कि वो इस तरह की फ़िल्मों को पसंद करते हैं। शाहिद ने कहा कि दर्शकों ने ऊरी और कबीर सिंह को बराबर प्यार दिया ऊरी का हीरो आदर्श वाला है जबकि कबीर सिंह उसके विपरीत फिर भी दर्शकों को दोनों पसंद आए। इससे पता चलता है कि दर्शकों की पसंद कितनी बदली है।

Kiyara Adwani- Shahid Kapoor

शाहिद की बात से ये पता चलता है कि सफलता के नशे में शाहिद इस क़दर चूर हैं कि शत्रुओं से लोहा लेते सैनिकों के जीवन पर बनी फ़िल्म ऊरी की तुलना कबीर सिंह से करते हैं जहाँ नायक नशे में धुत्त अपनी महिला साथी के साथ अमानवीय व्यवहार करता है।

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