मुम्बई: पिछले कुछ महीनों से ‘नेपोटिज़्म’ की बहस चल रही है, इस बहस को चलाने वाले अधिकतर वो लोग हैं जो बॉलीवुड के बाहर से हैं और सुशांत सिंह राजपूत की मौ’त के बाद जैसे उन्हें मौक़ा मिल गया है. कंगना रानौत जोकि अपने सालों पहले के वीडियो में नेपोटिज़्म को कोई बुरी चीज़ नहीं मानती हुई दिख रही थीं अब उनको इससे बड़ी परेशानी हो रही है. कई ऐसे अभिनेता-अभिनेत्री जो कई फ़िल्मों में काम करने के बाद भी कामयाबी न हासिल कर सके वो भी इसके ज़रिए अपनी भड़ास निकाल रहे हैं.

‘नेपोटिज़्म’ या ‘परिवारवाद’ के मुद्दे पर बहस बुरी बात नहीं है लेकिन जिस तरह से कई अभिनेता अभिनेत्रियों को सोशल मीडिया पर गाली दी जा रही है उसे कोई भी सभ्य समाज का व्यक्ति ठीक नहीं कहेगा. इन्हीं सब बातों पर बॉलीवुड अभिनेता चंकी पांडे ने अपना पक्ष रखा है. चंकी की बेटी अनन्या पांडे भी बॉलीवुड में अपने क़दम रख चुकी हैं. चंकी पांडे ने भी नेपोटिज़्म पर बयान दिया और इस बहस को ग़लत बताया है.

चंकी ने कहा कि जब कोई एक्टर या एक्ट्रेस अपनी पहली फ़िल्म साइन करता है, उसी समय वो इनसाइडर हो जाता है. उन्होंने कहा कि हर किसी का अपना संघर्ष है और दो करीयर्स को कम्पेयर नहीं किया जा सकता..करीयर में हमेशा हिट और मिस होते हैं. चंकी कहते हैं कि आप एक जगह पहुंचते हैं फिर आप बिज़ी हो जाते हैं, तो किसी और को रोल मिलता है, फिर कोई और बिज़ी हो जाता है तो किसी और को रोल मिलता है.. मुझे नहीं लगता इसमें कुछ भी इनसाइडर-आउटसाइडर जैसा है. चंकी दावा करते हैं कि इंडस्ट्री में 30 साल गुज़ार लेने के बाद मुझे ये महसूस हुआ है कि सबको यहां को-वर्कर की तरह की ट्रीट किया जाता है, किसी में कोई अंतर नहीं देखा जाता’.

चंकी इस बात से दुखी दिखे कि ट्रोलर्स के निशाने पर उनकी बेटी अनन्या पांडे आ जाती हैं. उन्होंने कहा कि एक बाप के तौर पर उन्हें इस तरह की चीज़ों से डर लगता है. उन्होंने कहा कि मुझे उन बच्चों की फ़िक्र होती है जिन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जाता है. उल्लेखनीय है कि अनन्या भी एक अभिनेत्री हैं. उन्होंने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत फ़िल्म ‘स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2’ से की थी.

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