मुम्बई: आर्यन ख़ान, अरबाज़ मर्चंट और मुनमुन धमेचा को आज बॉम्बे हाई कोर्ट ने ज़मानत दे दी है. शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान को ज़मानत मिलने के बाद ‘मन्नत’ में ख़ुशी का माहौल है. शाहरुख़ के पूरे घर में आज रौनक रही. शाहरुख़ की बेटी सुहाना ने भी इस शुभ अवसर पर अपने इन्स्टा अकाउंट से फ़ोटोज़ शेयर कीं.

थ्रो बैक फोटो में वह अपने पिता और अपने भाई आर्यन के साथ दिख रही हैं. वहीं शाहरुख़ के सबसे छोटे बेटे अबराम ख़ान भी आज अपनी नैनी के साथ ‘मन्नत’ की बालकनी पर नज़र आए. शाहरुख़ को उनके फैन्स का लगातार समर्थन मिला और ज़मानत के फ़ैसले के बाद तो जैसे जश्न का माहौल हो गया.

इसके पहले आज बॉम्बे हाई कोर्ट में इस केस की सुनवाई हुई. इसके पहले आज बॉम्बे हाई कोर्ट ने आर्यन ख़ान को ज़मानत दे दी. आज हुई सुनवाई में NCB की ओर से कई दलीलें रखी गईं. हालाँकि उनकी सभी दलीलें बेकार गईं. ASG ने आरोपियों पर सेक्शन 28 और 29 लगाने की बात की. इस पर कोर्ट ने कहा कि रिमांड के समय तो आपने ऐसा कुछ नहीं कहा था.

बचाव पक्ष की ओर से अमित देसाई ने जोड़ा कि अरेस्ट मेमो में भी इसका ज़िक्र नहीं है. इस पर ASG ने कहा कि लेकिन पहली रिमांड एप्लीकेशन में इसका ज़िक्र है. ASG ने माना कि आर्यन ख़ान के पास से कोई पज़ेशन नहीं था लेकिन उनके साथ गए अरबाज़ मर्चंट के पास था. आर्यन के पक्ष में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल देसाई ने कहा कि NCB की तरफ़ से कहा जा रहा है कि कोई कांस्पीरेसी इसमें है लेकिन इस बात में कोई सच नहीं है क्यूँकि अगर कांस्पीरेसी होती तो आर्यन ख़ान सिर्फ़ अरबाज़ को नहीं सभी को जानता होता और सभी से बात कर रहा होता लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है.

रोहतगी ने आगे कहा कि चार्ट में जिन लोगों का नाम है उनके अलावा दो और लोग थे जिन्हें आर्यन जानते थे, एक मानव और दूसरे गाबा. गाबा ने ही आर्यन को बुलावा भेजा था लेकिन दोनों की गिरफ़्तारी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि ये सही है कि कांस्पीरेसी को साबित करना मुश्किल होता है लेकिन तथ्य अपने आप बोलते हैं.

आर्यन के पक्ष में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल देसाई ने कहा कि NCB की तरफ़ से कहा जा रहा है कि कोई कांस्पीरेसी इसमें है लेकिन इस बात में कोई सच नहीं है क्यूँकि अगर कांस्पीरेसी होती तो आर्यन ख़ान सिर्फ़ अरबाज़ को नहीं सभी को जानता होता और सभी से बात कर रहा होता लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है.

रोहतगी ने आगे कहा कि चार्ट में जिन लोगों का नाम है उनके अलावा दो और लोग थे जिन्हें आर्यन जानते थे, एक मानव और दूसरे गाबा. गाबा ने ही आर्यन को बुलावा भेजा था लेकिन दोनों की गिरफ़्तारी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि ये सही है कि कांस्पीरेसी को साबित करना मुश्किल होता है लेकिन तथ्य अपने आप बोलते हैं.

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