दोस्तों, आपका स्वागत है ‘चुग़लीबाज़’ में. आज हम अपनी स्पेशल चर्चा में बात करेंगे उन फ़िल्म अभिनेत्रियों की जिन्हों कैंस’र की गं’भीर बी’मारी से जी-जान से लड़ा और इस जंग में उन्हें जीत भी हासिल हुई. इससे पहले कि हम आज की बात शुरू करें, हम आपसे गुज़ारिश करेंगे कि हमारी पोस्ट अगर पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ शेयर ज़रूर करें और हमारे फ़ेसबुक पेज को फॉलो करना न भूलें. कोई बात अगर आप हमसे कहना चाहते हैं तो कमेन्ट बॉक्स में लिखें.

सबसे पहले बात करेंगे हम सोनाली बेंद्रे की. सोनाली अपने समय की सबसे ख़ूबसूरत अभिनेत्री मानी जाती थीं. 1994 में फ़िल्म “आग” से अपने करीयर की शुरुआत करने वालीं सोनाली ने कई बड़ी हिट फ़िल्मों में काम किया है. आमिर ख़ान के साथ आयी ‘सरफ़रोश’ में उनकी क्यूट लड़की की भूमिका सराही गई. सोनाली एक कैं’सर सर-वाईवर हैं. उन्हें मेटास्टेटिक कैंस’र (Metastatic Cancer) था. इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने फैन्स के साथ साझा की थी. उनका इलाज न्यूयॉर्क शहर में हुआ.

इस लिस्ट में दूसरा नाम 90 के दशक की ऐसी हीरोइन का जिसको माधुरी दीक्षित के टक्कर में माना जाता था. जी, हम बात कर रहे हैं मनीषा कोईराला की. मनीषा फ़िल्म ‘सौदागर’ से शोबिज़ में आयीं और अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीत ले गईं. 42 साल की उम्र में उन्हें मालूम हुआ कि वो ओवेरियन कैंस’र से पी’ड़ित हैं. उन्हें अपनी इस बी’मारी पर जीत दर्ज करने के लिए कई तरह की सर्जरी और कीमोथेरेपी से गुज़रना पड़ा. सन 2015 में उन्हें कैं’सर मुक्त करार दिया गया.

इस लिस्ट में तीसरा नाम लीज़ा रे का है. 2001 में ‘क़सूर’ में एक वकील की भूमिका निभाने वाली लीज़ा ने कम फ़िल्में कीं लेकिन उन्होंने इनका चुनाव बहुत समझ कर किया. उन्हें 2009 में मालूम हुआ कि वो ‘मल्टीपल माइलोमा’ नाम के कैंस’र से पीड़ि’त हैं. इस कैं’सर को काफ़ी रेयर माना जाता है और बहुत कम लोगों में ही होता है. लीज़ा ने हार नहीं मानी और साल 2010 में उन्होंने ये जंग जीत ली.

अब हम बात करने जा रहे हैं दिग्गज फ़िल्म अभिनेत्री मुमताज़ की. मुमताज़ उस समय सबसे बड़ी फ़ीमेल स्टार मानी जाती थीं जब राजेश खन्ना सबसे बड़े मेल स्टार थे. मुमताज़ ने एक से बढ़कर एक फ़िल्में दीं. सन 2000 में उन्हें ब्रेस्ट कैं’सर हुआ था.

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