चुग़लीबाज़ की इस नई सीरीज़ में हम किसी की चुग़ली नहीं करेंगे बल्कि आपको कुछ ऐसे महान लोगों के क़िस्से बताएँगे जिनसे हमें सीख भी मिलेगी और प्रेरणा भी. इस फ़ेहरिस्त की पहली कड़ी में आज हम लेकर हाज़िर हैं भारत रत्न से सम्मानित डॉ विश्वेश्वरैया के एक बड़े मशहूर क़िस्से के बारे में. डॉ विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितम्बर 1861 को हुआ था, उनके पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री और माँ का नाम वेंकट लक्ष्मी था. उन्हीं के जन्मदिवस वाले दिन देश में इंजिनियर दिवस मनाया जाता है.

वह मशहूर इंजिनियर थे और मैसूर के दीवान भी थे. उनको एक क़द्दावर राजनेता के रूप में भी जाना जाता है. आज हम उनके बारे में एक अहम् क़िस्सा बताने जा रहे हैं. ये एक सच्ची घटना है. हुआ ये कि रात का समय था और ट्रेन में लोग सफ़र कर रहे थे. आधी रात से भी ज़्यादा हो चुकी थी लेकिन तभी एक आदमी जोकि खिड़की पर सो रहा था, अचान’क ही जाग गया और उसने खड़े होकर ट्रेन की चेन खींच दी. इस वजह से ट्रेन रुक गई. ट्रेन के रुकने के बाद हंगामे का माहौल हो गया.

एम विश्वेश्वरैया

रेलवे कर्मचारी ये जानने के लिए डिब्बे में आए कि किसने ट्रेन की चेन खींची और क्यूँ. इस पर उस आदमी ने बताया कि ट्रेन की चेन मैंने खींची और इस बात की वजह उस व्यक्ति ने बताई कि आगे पटरी टू’टी है और एक्सीडेंट हो जाने का ख़तरा है. इस बात पर कर्मचारी उससे उलझने लगे और कुछ यात्री भी. यात्रियों की परेशानी ये थी कि उन्हें देर हो रही थी और चेन खींचे जाने से उन्हें और देर हो सकती थी. इस पर उस आदमी ने कहा कि आप चेक कर लें आगे पटरी.

पटरी चेक की गई तो मालूम हुआ कि उस आदमी की बात एकदम ठीक थी और आगे पटरी में ब्रेक था. लोग हक्के-बक्के रह गए कि उस आदमी को ये बात कैसे पता चली तो इस पर लोगों ने उसे कहा कि क्या आपके पास कोई जादुई शक्ति है जिससे आपको ये बात पता चल गई. इस पर उस आदमी ने कहा कि नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है..मैं खिड़की पे सर रख कर सो रहा था लेकिन मेरा ध्यान ट्रेन की आवाज़ पर था और मुझे समझ आया कि ट्रेन की आवाज़ बदल गई है. इस तरह उस आदमी के ऑब्रज़वेशन से एक बड़ी दु’र्घटना बच गई. यहाँ जिस आदमी का ज़िक्र हो रहा है वो कोई और नहीं बल्कि महान वैज्ञानिक डॉ मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ही थे.

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