इरफ़ान ख़ा’न का अस’मय जाना कई लोगों को दु’खी कर गया। इरफ़ान का स्वभाव उन्हें लाखों लोगों के दिलों में ब’सने ला’यक बना दिया था जिसके कार’ण उन्हें याद करने वालों में न सिर्फ़ फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग शा’मिल हैं बल्कि कई आम लोग भी शा’मिल हैं। उन्हें याद करके उनके लिए कुछ न कुछ लिखकर तो सभी ने अपने दुः’ख का इज़हा’र किया है लेकिन उन्हें याद करने का एक नया ही अन्दा’ज़ सामने आया महाराष्ट्र के एक गाँव में। इस गाँव के लोगों ने इरफ़ान के लिए क्या किया ये बता’ने से पहले आपको बताते चलें कि आख़िर इरफ़ान का इस गाँव से रिश्ता कैसे जु’ड़ा।

महाराष्ट्र का ये गाँव इगतपुरी के पास ब’सा है और यहाँ कोई भी सिनेमाघर भी नहीं है लेकिन इस गाँव के लोगों ने इरफ़ान ख़ा’न की एक भी फ़िल्म कभी मि’स नहीं की। ये आश्च’र्य की बात लगती है कि गाँव में सिनेमाघर के न होने के बाद भी पूरा का पूरा गाँव इरफ़ान ख़ा’न का दीवा’ना है और वो भी इतना कि कोई भी उनकी एक भी फ़िल्म देखने से नहीं चू’कता। तो आपको बता दें कि ये दीवा’नापन इरफ़ान की अदा’कारी की वज’ह से नहीं बल्कि इरफ़ान के व्य’क्तित्व की वज’ह से है कुछ साल पहले इरफ़ान ख़ा’न इस गाँव में आए थे और उन्होंने यहाँ लोगों से बात की, इसके बा’द से सभी इरफ़ान ख़ा’न को बहुत ज़्यादा पसंद करने लगे।


दरअ’सल इरफ़ान यहाँ ज़’मीन ख़री’दने के लिए आए थे और यहाँ आ’दिवासी बस्ति’यों को देखकर उनसे बातची’त की। इरफ़ान ने जब ये देखा कि वहाँ स्वास्थ्य और शिक्षा की उ’चित व्यव’स्था नहीं है तो उन्होंने इसका बी’ड़ा उ’ठाया और उन्होंने वहाँ के र’हन- स’हन के स्त’र को बद’लने की को’शिश की। इसके लिए उन्होंने बच्चों के लिए किताबें, स्वेटर, कम्प्यूटर और ज़’रूरी सामा’न उन्हें ला’कर दिया। यही नहीं इरफ़ान उनके त्योहारों में श’रीक हुआ करते थे और उनकी परेशा’नियों का भी हि’स्सा बनते थे। गाँव की म’दद करने वाले इरफ़ान ख़ा;न की फ़िल्म देखने के लिए पूरे गाँव के लोग 30 किलोमीटर दूर ना’शिक जाकर उनकी फ़िल्म दे’खकर आते हैं।

इगतपुरी ज़िला परिषद के अंतर्गत आने वाले इस इला’क़े में लोग इरफ़ान को बहुत मा’नते हैं। ज़िला परिषद के सदस्य गोरख बोडके ने बताया, “इरफ़ान हमारे लिए फ़’रिश्ता ही थे। हमने कोई भी म’दद उनसे माँ’गी तो उन्होंने कभी न नहीं किया। वो हमारे साथ ह’मेशा ख’ड़े रहे। उन्होंने यहाँ एम’ब्यूलें’स, स्कूल और किताबों की व्यव’स्था कर’वायी।” इस गाँव के लोगों का इरफ़ान के प्रति इतना स्ने’ह है कि उन्होंने इरफ़ान के नि’धन पर ग’हरा शो’क ज’ताया और उन्हें याद करने का एक अल’ग ही तरी’क़ा अपनाया है। इस गाँव के लोगों ने मिलकर गाँव का नाम ही बद’लने का फ़ै’सला किया।

गाँव के लोगों ने इस गाँव का नाम बद’लकर “हीरो ची वाड़ी” रखने का फ़ै’सला किया है। हीरो ची वाड़ी का अर्थ है “हीरो की बस्ती”। ये नाम इस गाँव को आधिका’रिक रूप से दिया जाएगा। किसी भी अभिनेता के लिए ये बहुत बड़ी बात होगी। सच ही कहा जाता है कि इंसान के अच्छे काम उनके जाने के बाद भी उनका नाम बनाए रखते हैं और लोग उन्हें सालों साल याद रखते हैं। इरफ़ान ख़ा’न ने अपनी छोटी सी उम्र में भी लोगों का दिल इस तरह जी’त लिया कि वो लोगों की यादों में हमेशा ब’से रहें’गे।

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